तकलीफ खुद ही कम हो गई
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कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ
नहीं रहूँगा मैं तब भी रहूँगा
मैं कभी सिगरेट पीता नहीं
बचपन में भरी दुपहरी में नाप आते थे पूरा मोहल्ला
थोड़ा सुकून भी ढूँढिये जनाब
मेरी लिखी हर बात को कोई समझ नहीं पाता
भूलने की कोशिश करते हो
थम के रह जाती है जिंदगी
तेरे शहर तक पहुँच तो जाता
जिंदगी ये तेरी खरोंचे हैं मुझ पर