तकलीफ खुद ही कम हो गई
More Gulzar Shayari in Hindi
बचपन में भरी दुपहरी में नाप आते थे पूरा मोहल्ला
पनाह मिल जाए रूह को जिसका हाथ थामकर
थम के रह जाती है जिंदगी
पलक से पानी गिरा है तो उसको गिरने दो
तारीफ़ अपने आप की करना फ़िज़ूल है
कौन कहता है कि हम झूठ नहीं बोलते
तेरे शहर तक पहुँच तो जाता
नहीं रहूँगा मैं तब भी रहूँगा
उम्र जाया कर दी औरों के वजूद में नुक्स निकालते
चखकर देखी है कभी तन्हाई तुमने