ये माना इस दौरान कुछ साल बीत गए
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तेरे शहर तक पहुँच तो जाता
कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ
पनाह मिल जाए रूह को जिसका हाथ थामकर
ऐ उम्र अगर दम है तो कर दे इतनी सी खता
थम के रह जाती है जिंदगी
चखकर देखी है कभी तन्हाई तुमने
ये माना इस दौरान कुछ साल बीत गए
उम्र जाया कर दी औरों के वजूद में नुक्स निकालते
तारीफ़ अपने आप की करना फ़िज़ूल है
क्या पता कब कहाँ मारेगी