पनाह मिल जाए रूह को जिसका हाथ थामकर
More Gulzar Shayari in Hindi
आखिर कह ही डाला उसने एक दिन
क्या पता कब कहाँ मारेगी
कौन कहता है कि हम झूठ नहीं बोलते
कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ
बचपन में भरी दुपहरी में नाप आते थे पूरा मोहल्ला
तकलीफ खुद ही कम हो गई
थम के रह जाती है जिंदगी
नहीं रहूँगा मैं तब भी रहूँगा
अक्सर वही दिये हाथों को जला देते हैं
मेरी लिखी हर बात को कोई समझ नहीं पाता