थोड़ा सुकून भी ढूँढिये जनाब
More Gulzar Shayari in Hindi
तेरे शहर तक पहुँच तो जाता
आखिर कह ही डाला उसने एक दिन
कब आ रहे हो मुलाक़ात के लिए
कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ
पलक से पानी गिरा है तो उसको गिरने दो
जिंदगी ये तेरी खरोंचे हैं मुझ पर
क्या पता कब कहाँ मारेगी
चखकर देखी है कभी तन्हाई तुमने
मेरी लिखी हर बात को कोई समझ नहीं पाता
ऐ उम्र अगर दम है तो कर दे इतनी सी खता