हम ने अकसर तुम्हारी राहों में
More Gulzar Shayari in Hindi
भूलने की कोशिश करते हो
उम्र जाया कर दी औरों के वजूद में नुक्स निकालते
क्या पता कब कहाँ मारेगी
बचपन में भरी दुपहरी में नाप आते थे पूरा मोहल्ला
कब आ रहे हो मुलाक़ात के लिए
तुझको बेहतर बनाने की कोशिश में
हम ने अकसर तुम्हारी राहों में
पनाह मिल जाए रूह को जिसका हाथ थामकर
मेरी लिखी हर बात को कोई समझ नहीं पाता
अक्सर वही दिये हाथों को जला देते हैं