तारीफ़ अपने आप की करना फ़िज़ूल है
More Gulzar Shayari in Hindi
उम्र जाया कर दी लोगों ने
बुझ जाएंगी सारी आवाजें यादें यादें रह जाएंगी
तारीफ़ अपने आप की करना फ़िज़ूल है
भूलने की कोशिश करते हो
बचपन में भरी दुपहरी में नाप आते थे पूरा मोहल्ला
मैं तो चाहता हूँ हमेशा मासूम बने रहना
तुम मिले तो क्यों लगा मुझे खुद से मुलाकात हो गई
हम ने अकसर तुम्हारी राहों में
कब आ रहे हो मुलाक़ात के लिए
मिलता तो बहुत कुछ है इस ज़िन्दगी में