आखिर कह ही डाला उसने एक दिन
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कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ
मैं कभी सिगरेट पीता नहीं
क्या पता कब कहाँ मारेगी
भूलने की कोशिश करते हो
थम के रह जाती है जिंदगी
लगता है जिंदगी आज कुछ ख़फ़ा है
नहीं रहूँगा मैं तब भी रहूँगा
हम ने अकसर तुम्हारी राहों में
ये माना इस दौरान कुछ साल बीत गए
बचपन में भरी दुपहरी में नाप आते थे पूरा मोहल्ला