क्या पता कब कहाँ मारेगी
More Gulzar Shayari in Hindi
आखिर कह ही डाला उसने एक दिन
तुम मिले तो क्यों लगा मुझे खुद से मुलाकात हो गई
मेरी लिखी हर बात को कोई समझ नहीं पाता
क्या पता कब कहाँ मारेगी
भूलने की कोशिश करते हो
थम के रह जाती है जिंदगी
मिलता तो बहुत कुछ है इस ज़िन्दगी में
चखकर देखी है कभी तन्हाई तुमने
हम ने अकसर तुम्हारी राहों में
कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ