जिंदगी ये तेरी खरोंचे हैं मुझ पर
More Gulzar Shayari in Hindi
ऐ उम्र अगर दम है तो कर दे इतनी सी खता
बचपन में भरी दुपहरी में नाप आते थे पूरा मोहल्ला
ये माना इस दौरान कुछ साल बीत गए हैं
तेरे शहर तक पहुँच तो जाता
पलक से पानी गिरा है तो उसको गिरने दो
आखिर कह ही डाला उसने एक दिन
तुम मिले तो क्यों लगा मुझे खुद से मुलाकात हो गई
कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ
ख्वाईशें तो आज भी बगावत करना चाहती है
क्या पता कब कहाँ मारेगी