मिलता तो बहुत कुछ है इस ज़िन्दगी में
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ये माना इस दौरान कुछ साल बीत गए हैं
ख्वाईशें तो आज भी बगावत करना चाहती है
मैं तो चाहता हूँ हमेशा मासूम बने रहना
आखिर कह ही डाला उसने एक दिन
मिलता तो बहुत कुछ है इस ज़िन्दगी में
तकलीफ खुद ही कम हो गई
तुम मिले तो क्यों लगा मुझे खुद से मुलाकात हो गई
अक्सर वही दिये हाथों को जला देते हैं
हम ने अकसर तुम्हारी राहों में
मैं कभी सिगरेट पीता नहीं