ख्वाईशें तो आज भी बगावत करना चाहती है
More Gulzar Shayari in Hindi
तारीफ़ अपने आप की करना फ़िज़ूल है
जिंदगी ये तेरी खरोंचे हैं मुझ पर
आखिर कह ही डाला उसने एक दिन
तकलीफ खुद ही कम हो गई
तुझको बेहतर बनाने की कोशिश में
मैं कभी सिगरेट पीता नहीं
थोड़ा सुकून भी ढूँढिये जनाब
मिलता तो बहुत कुछ है इस ज़िन्दगी में
बुझ जाएंगी सारी आवाजें यादें यादें रह जाएंगी
पनाह मिल जाए रूह को जिसका हाथ थामकर