कहां जख्म खोल बैठा पगले यह नमक का शहर है
More 2 Line Shayari in Hindi
हम समंदर हैं हमें खामोश ही रहने दो
ऐलान उसका देखिए कि वो मजे में है
फितूर होता है हर उम्र में जुदा जुदा
शायरों की बस्ती में कदम रखा तो जाना
तुम तस्वीरें बदलो मैं तारीफ के तरीके
कहां जख्म खोल बैठा पगले यह नमक का शहर है
एक लाइन में क्या तेरी तारी लिखूँ
उम्र कटी दो अल्फ़ाज़ में एक आस में एक काश में
सुनने वाला ही न सुन पाए तो ये बात अलग है
तहजीब अदब और सलीका भी तो कुछ है