खुले आसमान में जमी से बात न करो ज़ी लो ज़िंदगी ख़ुशी का आस न करो
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बंदे हैं हम देश के हम पर किसका ज़ोर मकर संक्रान्ति में उड़े पतंगे चारो ओर
बाजरे की रोटी निम्बू का आचार सूरज की किरणें चाँद की चांदनी
सपनों को लेकर मन में उड़ायेंगे पतंग आसमान में
त्यौहार नहीं होता अपना पराया त्यौहार है वही जिसे सबने मनाया
पल पल सुनहरे फूल खिले कभी ना हो कांटों का सामना
दिल में है छायी मस्ती मन में भरी है उमंग उड़ती हैं पतंगें रंग बिरंगी
तिल हम हैं और गुड़ आप मिठाई हम हैं और मिठास आप
खुले आसमान में जमी से बात न करो ज़ी लो ज़िंदगी ख़ुशी का आस न करो
मुंगफली की खुश्बु और गुड़ की मिठास दिलों में खुशी और अपनो का प्यार
हो आपके जीवन में खुशियाली कभी भी न रहे कोई दुख देने वाली पहेली